Utkarsh_bauddh
हमारा सूर्य नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) नामक प्रक्रिया के कारण जिंदा है और लगातार ऊर्जा देता रहता है। सूर्य लगभग 4.6 अरब वर्ष पुराना है और आने वाले कई अरब वर्षों तक इसी तरह चमकता रहेगा।
सूर्य के केंद्र (कोर) में तापमान लगभग 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस होता है और दबाव अत्यधिक होता है। इस भीषण ताप और दबाव के कारण हाइड्रोजन के परमाणु आपस में मिलकर हीलियम बनाते हैं। इस प्रक्रिया में थोड़ा-सा द्रव्यमान ऊर्जा में बदल जाता है, जिसे आइंस्टीन के सूत्र E = mc² से समझा जाता है। यही ऊर्जा सूर्य से प्रकाश और ऊष्मा के रूप में निकलती है।
सूर्य के जिंदा रहने का सबसे बड़ा कारण दो विपरीत शक्तियों का संतुलन है। एक ओर सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल है, जो सारी गैसों को भीतर की ओर खींचता है। दूसरी ओर नाभिकीय संलयन से उत्पन्न ऊर्जा का बाहरी दबाव है, जो सूर्य को फैलने से रोकता है। इन दोनों के संतुलन को हाइड्रोस्टैटिक संतुलन कहते हैं। जब तक यह संतुलन बना रहता है, सूर्य स्थिर और जीवित रहता है।
सूर्य के केंद्र में बनी ऊर्जा तुरंत बाहर नहीं आती। यह पहले विकिरण क्षेत्र (Radiative Zone) से होकर धीरे-धीरे बाहर जाती है, जहाँ ऊर्जा किरणों के रूप में चलती है। इसके बाद यह संवहन क्षेत्र (Convective Zone) में पहुँचती है, जहाँ गर्म गैस ऊपर उठती है और ठंडी गैस नीचे जाती है। अंत में ऊर्जा सूर्य की सतह फोटोस्फियर से प्रकाश के रूप में अंतरिक्ष में फैल जाती है।
सूर्य के पास हाइड्रोजन ईंधन का विशाल भंडार है। हर सेकंड लगभग 60 करोड़ टन हाइड्रोजन हीलियम में बदल जाती है, फिर भी सूर्य इतना विशाल है कि यह प्रक्रिया लगभग 10 अरब वर्षों तक चल सकती है। वर्तमान में सूर्य अपने जीवन के मध्य चरण में है।
भविष्य में जब हाइड्रोजन समाप्त होने लगेगी, तो सूर्य लाल दानव (Red Giant) बन जाएगा। बाद में वह अपनी बाहरी परतें छोड़कर श्वेत बौना (White Dwarf) बन जाएगा।
इस प्रकार, नाभिकीय संलयन, गुरुत्वाकर्षण संतुलन और विशाल ईंधन भंडार के कारण हमारा सूर्य जिंदा है और पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाता है।
