भगत सिंह को फाँसी इसलिए दी गई क्योंकि वे अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल थे और ब्रिटिश सरकार ने उन्हें राजद्रोही माना

मुख्य कारण:
- अंग्रेज़ी शासन का विरोध
भगत सिंह भारत को आजाद कराना चाहते थे। वे अंग्रेज़ों के अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाते थे। - सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली में बम फेंकना (1929)
भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने असेंबली में ऐसे बम फेंके जिनसे किसी की जान न जाए।
उनका उद्देश्य था अंग्रेज़ सरकार को जगाना और अपने विचार जनता तक पहुँचाना। - अंग्रेज़ अधिकारी सांडर्स की हत्या
लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए भगत सिंह के साथियों ने ब्रिटिश अधिकारी जे.पी. सांडर्स को गोली मारी।
अंग्रेज़ सरकार ने इसे गंभीर अपराध माना। - अंग्रेज़ों की अदालत का फैसला
ब्रिटिश अदालत ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को मौत की सज़ा सुनाई।
निष्कर्ष:
23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी दी गई।
अंग्रेज़ सरकार की नजर में वे अपराधी थे,
लेकिन भारत की जनता के लिए वे अमर शहीद हैं।